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GPM में परिवहन विभाग की बड़ी लापरवाही? कार्यालय को ही नहीं पता जिले में कितनी टैक्सी गाड़ियां बिना परमिट दौड़ रहीं

RTI में चौंकाने वाला खुलासा: जन सूचना अधिकारी ने कहा- परमिट संबंधी जानकारी बिलासपुर कार्यालय में संधारित

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। जिले में बिना टैक्सी परमिट के संचालित हो रहे चारपहिया वाहनों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मांगी गई जानकारी में जिला परिवहन कार्यालय (GPM) ने यह कहकर हाथ खड़े कर दिए कि वाहन परमिट से जुड़ी जानकारी उनके पास उपलब्ध नहीं है और इसका संधारण बिलासपुर स्थित क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय में किया जाता है, क्योंकि परमिट वहीं से जारी किए जाते हैं।

इस जवाब के बाद जिले में परिवहन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा है कि जिले में बड़ी संख्या में निजी चारपहिया वाहन बिना वैध टैक्सी परमिट के शासकीय कार्यालयों और निजी संस्थानों में व्यावसायिक उपयोग के लिए संचालित किए जा रहे हैं।

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राजस्व को लाखों का नुकसान, निगरानी व्यवस्था पर सवाल

जानकारों का कहना है कि यदि बिना परमिट वाहन व्यावसायिक गतिविधियों में लगे हुए हैं तो इससे शासन को टैक्स एवं अन्य शुल्क के रूप में मिलने वाले राजस्व का नुकसान हो रहा है। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर परिवहन विभाग की निगरानी व्यवस्था किस स्तर पर काम कर रही है।

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स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिले में कई वाहन वर्षों से टैक्सी की तरह संचालित हो रहे हैं, लेकिन उनके परमिट, फिटनेस और अन्य आवश्यक दस्तावेजों की नियमित जांच नहीं की जाती। इससे विभागीय कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

शासकीय कार्यालयों में भी बिना परमिट वाहनों के उपयोग के आरोप

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मामले का सबसे गंभीर पहलू यह बताया जा रहा है कि कई शासकीय कार्यालयों में अधिकारियों द्वारा निजी वाहनों को किराए पर लेकर शासकीय कार्यों में उपयोग किया जा रहा है। आरोप है कि इनमें से कुछ वाहन टैक्सी परमिट के बिना ही संचालित हो रहे हैं, जबकि भुगतान टैक्सी दरों के अनुसार किया जा रहा है।

वहीं निजी संस्थानों में भी निजी पंजीयन वाले वाहनों का उपयोग किराए की गाड़ियों के रूप में किए जाने की शिकायतें सामने आती रही हैं। इसके बावजूद परिवहन विभाग की ओर से प्रभावी कार्रवाई नजर नहीं आ रही है।

दुर्घटना की स्थिति में बढ़ सकती हैं परेशानियां

विशेषज्ञों के अनुसार यदि कोई निजी वाहन बिना वाणिज्यिक परमिट के टैक्सी संचालन में लगा हो और दुर्घटना हो जाए, तो बीमा क्लेम के दौरान गंभीर कानूनी और आर्थिक जटिलताएं उत्पन्न हो सकती हैं। ऐसे मामलों में पीड़ित पक्ष को लंबे समय तक मुआवजे और बीमा दावों के लिए संघर्ष करना पड़ सकता है।

अब विभाग के सामने बड़ा सवाल

RTI के जवाब ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जिला परिवहन कार्यालय के पास जिले में संचालित टैक्सी परमिट वाहनों की संपूर्ण जानकारी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि बिना परमिट संचालित वाहनों की पहचान, निगरानी और कार्रवाई कैसे की जा रही है।

अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय और जिला परिवहन प्रशासन जिले में टैक्सी परमिट एवं व्यावसायिक वाहनों का अद्यतन रिकॉर्ड कब तक तैयार करता है और बिना परमिट संचालन के मामलों पर क्या कार्रवाई की जाती है।

A Pranav

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